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जाटों ने रणथंभौर के किले को तहदीद दी

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जयपुर वकील रिपोर्ट्स में तज़्किरा मिलता है कि सरदार राजाराम के अगुवाई में जाटों ने रणथंभौर के किले को तहदीद दी। सरदार राजाराम जाट ने किलेदार से किला खाली करने को कहा और हमला करने की धमकी दी। डर से रणथंभौर के किलेदार ने अरज़दाश्त के ज़रिये जयपुर राजा से मदद तलब की।

रणवा जाटों की गौरवशाली विरासत सामी खेड़ा

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  सीकर जिले में स्थित सामी गांव, इतिहास के पन्नों में “सामी खेड़ा” के नाम से दर्ज है। इस गांव की स्थापना जाट जाति के रणवा गोत्र के पूर्वज सहजराव रणवा द्वारा 1054 ईस्वी (विक्रम संवत 1111) में की गई थी। सहजराव रणवा, रणवा गोत्र के संस्थापक माने जाते हैं। वे दहिया जाट वंश से संबंधित थे, जिनके पूर्वज उत्तर भारत के कन्नौज क्षेत्र से राजस्थान आए थे। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, दहिया क्षत्रिय कुल के राव मुतिया कमास विक्रम संवत 905 (848 ईस्वी) में कन्नौज से नागौर पहुंचे और वहां एक किले का निर्माण कराया। उनके वंशजों—लखन राव, बल्लू राव, जून राव और पीपा राव—ने लगभग 200 वर्षों तक नागौर क्षेत्र पर शासन किया। राव पीपाजी का विवाह माईहन राजा की पुत्री देयू जाखड़ से हुआ, जिनसे चार पुत्र उत्पन्न हुए—सहजराव, राजदेव, मंदेव और गंगदेव। इनमें सहजराव के वंशज रणवा गोत्र के नाम से प्रसिद्ध हुए, जबकि राजदेव के वंशज रोजा गोत्र कहलाए। बही-भाट (बड़वा बही) के अनुसार सहजराव रणवा को “सहजा” कहा गया है और उन्हें रणवा गोत्र का संस्थापक माना जाता है। सहजराव रणवा ने नागौर छोड़कर विक्रम संवत 1111 (1054 ईस्वी) में सामीखे...